12th Biology Examination 2024
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12th Biology Examination :- बिहार बोर्ड इंटर जीव विज्ञान परीक्षा 2024 महत्वपूर्ण लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ।

12th Biology Examination 2024 :- बिहार बोर्ड इंटर जीव विज्ञान परीक्षा 2024 महत्वपूर्ण लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ।

 

12th Biology Examination 2024 :- बिहार बोर्ड इंटर जीव विज्ञान परीक्षा 2024 महत्वपूर्ण लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ।

यदि आप अभी बिहार बोर्ड से 2024 में इंटर का परीक्षा देने के लिए तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए किस आर्टिकल के माध्यम से जीव विज्ञान का महत्वपूर्ण लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न बताया गया जो सीधे आपके परीक्षा में मिलने वाला है तो चलिए आप लोग नीचे हिंदी का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन याद कर ले ताकि आपको एग्जाम में अच्छा सा अच्छा नंबर मिले ।

 

1 . टीकाकरण एवं प्रतिरक्षीकरण पर टिप्पणी दें।

उत्तर :-

प्रतिरक्षीकरण या टीकाकरण का सिद्धांत प्रतिरक्षा तंत्र की स्मृति के गुण पर आधारित है। टीकाकरण में रोगजनक या निष्क्रियता/दुर्बलीकृत रोगजनक (टीका) की प्रतिजनी प्रोटीनों को निर्मित शरीर में प्रवेश कराई जाती है। इन प्रतिजनों के विरुद्ध शरीर में उत्पन्न प्रतिरक्षियों वास्तविक संक्रमण के दौरान रोगजनी कारकों को निष्प्रभावी बना देती है। टीका स्मृति बी और टी-कोशिकाएँ भी बनाते हैं जो परिवर्ती प्रभावन (सब्सीक्वेंट एक्सपोजर) होने पर रोगजनक को जल्दी से पहचान लेती हैं और प्रतिरक्षियों के भारी उत्पादन से हमलावर को हरा देती हैं। अगर व्यक्ति किन्ही ऐसे घातक रोगाणुओं से संक्रमित होता है जिसके लिए फौरन प्रतिरक्षियों की आवश्यकता है, जैसा कि टिटनेस में, तो प्रभावकारी निष्पादित प्रतिरक्षियों या प्रतिआविष को टीके के रूप में सीधे ही दिए जाने की जरूरत है। साँप के काटे जाने के मामलों में भी रोगी को जो सुई लगाई जाती है उसमें सर्प विष (वेनम) के विरुद्ध निष्पादित प्रतिरक्षी होते है। इस प्रकार का प्रतिरक्षीकरण निष्क्रिय प्रतिरक्षीकरण कहलाता है।

 

2 . जैवप्रौद्योगिकी के औद्योगिक उपयोग पर प्रकाश डालें।

उत्तर :-

 

जीव-जन्तुओं एवं उनके उत्पादों के व्यापारिक प्रयोगों का अध्ययन जैवप्रौद्योगिक के अंतर्गत किया जाता है। इस प्रौद्योगिकी के द्वारा विभिन्न प्रकार के उत्पाद उद्योगों के द्वारा बनाए जाते हैं। जैसे – (1) एण्टीबायोटिक्स औषधि, (2) विभिन्न प्रकार के टीके, (3) शराब उद्योग, (4) चमड़ा उद्योग, (5) तम्बाकू उद्योग, (6) सिरका उद्योग, (7) दुग्ध उद्योग, (8) मास उद्योग, (9) मत्स्य उद्योग, (10) सिल्क उद्योग आदि।
जैव प्रौद्योगिकी के द्वारा कई विटामिनों का निर्माण भी किया जाता है जैसे बी कॉम्लेक्स। इस विधि द्वारा इन्सुलिन नामक हॉर्मोन का उत्पादन किया जाता है। जैव प्रौद्योगिकी के द्वारा विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ बनाए जाते हैं। किण्वन विधि का प्रयोग कर बायोगैस का निर्माण कराया जाता है। जैव कीटनाशी, जैव उर्वरक कृषि क्षेत्र में प्रयुक्त होते हैं। जैव प्रौद्योगिकी का क्षेत्र व्यापक होता जा रहा है। आनेवाले समय में यह उद्योग काफी उपयोगी साबित होगा।

 

12th Biology Examination 2024
12th Biology Examination 2024

 

 

3 . कृषि में जैवप्रौद्योगिकी की भूमिका पर लिखें।

उत्तर :-

कृषि के क्षेत्र में भी जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण है जैसे- जैव उर्वरक – इसमें सूक्ष्मजीवाणुओं के कुछ समूह आते हैं जो मिट्टी और पौधों में नाइट्रोजन की आपूर्ति करते हैं। जैसे- राइजोबियम, क्लॉस्ट्रीडियम, एजोटोबॅक्टर, ऐनाबेना, नॉस्टॉक आदि।
जैव खाद – इसके अंतर्गत मल-मूत्र गोबर, पेड़-पौधों के टूटे भाग आदि आति हैं। जैव कीटनाशी – ट्राइकोडर्मा नामक कवकों में कीटरोधी गुण पाया जाता है। B. T. बैक्टीरिया में भी कीटरोधी गुण है। गैम्बुसिया नामक मछली मलेरिया के मच्छर के लावों को खा जाता है। इस प्रकार जैव प्रौद्योगिकी के द्वारा कीटनाशी तैयार होते है जो पर्यावरण प्रदूषण नहीं करता है। परजीवी फसल -जैव प्रौद्योगिकी द्वारा फसलों में अच्छे गुण वाले जीनों को प्रवेश कराकर उन्नत किस्म के फसल तैयार किए जाते हैं ऐसे फसल को परजीवी फसल कहते हैं जैसे B.t कपास। B.t बैगन, गोल्डेन राइस आदि। इस प्रकार कृषि के क्षेत्र में भी जैव प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रयोग हो रहे है जो फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण को भी नियंत्रित रखेंगे।

 

4 . मासिक चक्र क्या है? इसके विभिन्न अवस्थाओं का वर्णन हॉर्मोनल नियमीकरण के साथ दें।

उत्तर :-

मानव मादा में लैंगिक चक्र (रजोचक्र) – वह अवधि जिसके दौरान मानव मादा में संतान पैदा करने की क्षमता होती है, उसे जनन काल (fertility period) कहते हैं। खियों में यह 12-13 वर्ष की आयु (यौवनारंभ) से 45-50 वर्ष (रजोनिवृत्ति) menopause) तक चलता है। यौवनारंभ के बीच मादा जनन तंत्र में एक नियमित मासिक घटनाचक्र चलता रहता है, जिसे रजोचक्र (menstrual cycle) कहते हैं, रजोचक्र के दौरान होनेवाली घटनाएँ इस प्रकार हैं— (i) प्रत्येक रजोचक्र में हर 28 दिन में एक अण्डा परिपक्व होकर निकलता है। (ii) रजोचक्र का आरंभ रज-प्रवाह से होता है जिसके दौरान गर्भाशय का कोशिकीय अस्तर उतरकर बाहर निकलता है और उसके साथ-साथ रक्त प्रवाह होता है। यह प्रक्रिया 3-4 दिन चक चलती रहती है। (iii) रजोचक्र के आरंभ होने से पाँचवें से लेकर तेरहवें दिन तक ग्राफियन फॉलिकल की वृद्धि होती है और उसका परिपक्वन होता है। इस फॉलिकल में एक अण्डाणु होता है जिसे घेरती हुई कोशिकाओं की एक सहमति होती है। (iv) ग्राफियन फॉलिकल से एक हॉर्मोन एस्ट्रोजेन निकलता है जो गर्भाशय को अण्डाणु को प्राप्त करने की तैयारी के लिए उत्तेजित करता है। (v) गर्भाशय का अस्तर बनानेवाली कोशिकाएँ तेजी से वृद्धि करती हैं और रक्त वाहिकाओं का एक जाल बन जाता है। (vi) अण्डाशय से अण्डे का निकलना अण्डोत्सर्ग कहलाता है। अण्डोत्सर्ग रजोचक्र के आरंभ होने के -12-14 दिन बाद होता है। ग्रॉपियन फॉलिकल फूटकर अण्डा बन जाता है। (vii) फूट चुके फॉलिकल की कोशिकाएँ कॉर्पस ल्युटियम का रूप ले लेती है जिससे प्रोजेस्टोरॉन का स्राव निकलता है। (viii) अण्डा फैलोपियम नलिका में से होते हुए तेरहवें अथवा चौदहवें दिन गर्भाशय में पहुँचता है जहाँ वह सोलहवें दिन तक (यानी 48-73 घण्टे तक) कायम रहता है। (ix) यदि इस दौरान अण्डे को किसी शुक्राणु के मिलन का संयोग नहीं होता तो उसका अपक्षय होने लगता है। अठाइसवें दिन के अंत में अण्डा और उसके साथ-साथ गर्भाशय अस्तर भी बाहर निकल जाते हैं। (x) यह समय होता है गर्भाशय के मोटे अस्तर के धीमे विघटन का आरंभ होना।

 

 

5 . निम्नांकित पर संक्षेप में लिखें-

(a) यी०ओ०डी०

(b) कर्णक

उत्तर :-

(a) वी०ओ०डी० : बी.ओ.डी. जल में उपस्थित कार्बनिक प्रदूषकों की सांद्रता को बताता है। किसी भी जल में अगर बी ओ डी. की सांद्रता अधिक हो तो इसका अभिप्राय यह है कि वह जल कार्बनिक प्रदूषकों से संपन्न है। इस प्रकार बी.ओ.डी. ऑक्सीजन की उस मात्रा को इंगित करता है जो जीवाणु द्वारा एक लीटर जल में मौजूद कार्बनिक पदार्थों को ऑक्सीकृत करता है। ज्यों-ज्यों जीवाणु जल में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों की खपत करता जाता है त्यों-त्यों जल में बी-ओ.डी. की सांद्रता घटती जाती है। (b) ऊर्णक : यांत्रिक वातन टंकियों में यात्रिक रूप में वायवीय जीवाणु के लिए हवा प्रवाहित किया जाता है। इसके लिए पंप या वातक का प्रयोग किया जाता है जिससे इन जीवों को लगातार ऑक्सीजन मिलता रहता है। इससे वायवीय सूक्ष्मजीव लगातार एवं प्रबल वृद्धि कर जीवाणु झुंड के रूप में ऊर्णक बनाते हैं।

 

6 . निम्नांकित को परिभाषित करें- (a) सहलग्नता (b) सहलग्नता वर्ग (c) प्रत्यक्ष सहलग्नता (d) परोक्ष सहलग्नता

 

उत्तर :-

 

(a) सहलग्नता एक ही क्रोमोसोम पर उपस्थित वे जीन अथवा ऐलील जो अर्धसूत्री विभाजन के समय एक-दूसरे से बिना पृथक हुए उसी स्थिति में पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित होते रहते हैं, एक-दूसरे से सहलग्न होते हैं। ऐसी घटना को सहलग्नता कहते हैं।
(b) सहलग्नता वर्ग सभी सहलग्न जीन एक ही क्रोमोसोम पर उपस्थित होते हैं, इसलिए लिकेज वर्ग को अगुणित क्रोमोसोम संख्या से ही निरूपित करते हैं, जैसे ड्रोसोफिला में 4 लिकेज ग्रूप (x = 4) मक्के में 10 लिकेज ग्रूप ( = 10), मटर में 7 लिकेज ग्रूप (n=7) आदि। (c) प्रत्यक्ष सहलग्नता जो जीन पचास या इससे कम मैप युनिट्स की दूरी पर पाए जाते हैं उनमें प्रत्यक्ष सहलग्नता होती है। (d) परोक्ष सहलग्नता जो पचास से अधिक मैप युनिट्स पर पाए जाते है उनमें परोक्ष सहलग्नता होती है।

 

 

7 . निम्नलिखित पर संक्षेप में टिप्पणी लिखें- (a) पैलोण्ड्रोम्स (b) क्लोनिंग संवाहक

 

उत्तर :-

 

(a) पैलीण्डोम्स : ये वर्णों के समूह हैं जिन्हें आगे एवं पीछे दोनों तरफ से पढ़ने के लिए एक ही शब्द बनता है, जैसे ‘मलयालम’। पैलिड्रोम और DNA पैलिड्रोम में अंतर होता है। पैलिड्रोम में उसी शब्द को दोनों ओर से पढ़ा जा सकता है, परंतु DNA में पैलिड्रोम क्षारक युग्मों का एक ऐसा अनुक्रम है जो पढ़ने के अभिविन्यास को समान रखने पर दोनों लड़ियों में एक जैसे पढ़ा जाता है।
(b) क्लोनिंग संवाहक : प्लाज्मिड गोलाकार गुणसूत्र बाह्य DNA है जो स्वतः प्रतिकृति करता है। प्लाज्मिड तथा जीवाणुभोजी का उपयोग क्लोनिंग संवाहक के रूप में किया जाता है। प्लाज्मिड तथा जीवाणुभोजी दोनों ही जीवाणु कोशिकाओं में बिना गुणसूत्रीय DNA के स्वतंत्र रूप से प्रतिकृति करने की क्षमता रखते हैं। जीवाणुभोजियों की प्रत्येक कोशिका में बहुत अधिक संख्या होने के कारण जीवाणु कोशिका में इनके जीनोम की कई प्रतिकृति मिलती है। कुछ प्लाज्मिड की प्रतिकोशिका एक या दो प्रतिकृति होती है, परंतु अन्य कोशिकाओं में इनकी संख्या 15-100 तक हो सकती है। यह सख्या और अधिक हो सकती है।

 

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8 . प्रारंभ कूट तथा समापन कूट का वर्णन करें।

उत्तर :-

 

प्रारंभ कोडोन : अधिकांश प्रोटीन या पॉलिपेप्टाइड में प्रथम एमीनो अम्ल मिथियोनिन होता है एवं mRNA पर इसके लिए AUG या कभी-कभी GUG कोडोन रहते है। चेन बनने के पहले मिथियोनिन का फॉर्मॅइलेटेड होना आवश्यक होता है। वैसे कोडोन, जो पॉलिपेप्टाइड चेन बनाने की प्रक्रिया शुरू करते है उसे (AUG) चेन प्रारंभ कोडोन कहते हैं। समापन कोडोन 64 कोडोनों में तीन कोडोन (UAA, UAG एवं UGA) ऐसे होते हैं जो पॉलिपेप्टाइड चेन के समापन का संकेत देते हैं। इन्हें चेन समापन कोडोन कहते है ?

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नोट : –

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Mukesh Kumar
Mukesh Kumar is a Bihar native with a Bachelor's degree in Journalism from Magadh University. With three years of hands-on experience in the field of journalism, he brings a fresh and insightful perspective to his work. Mukesh Kumar is passionate about storytelling and uses his roots in Bihar as a source of inspiration. When he's not chasing news stories, government jobs updates, Bihar Board News government schemes, latest news updates, tech trends, current events in various fields including sports, gaming, politics, government policies, finance and etc.
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