10th Hindi Examination 2024
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10th Hindi Examination 2024 :- बिहार बोर्ड मैट्रिक हिन्दी परीक्षा 2024 महत्वपूर्ण लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ।

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10th Hindi Examination 2024 :- बिहार बोर्ड मैट्रिक हिन्दी परीक्षा 2024 महत्वपूर्ण लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ।

10th Hindi Examination 2024 :- बिहार बोर्ड मैट्रिक हिन्दी परीक्षा 2024 महत्वपूर्ण लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ।

यदि आप अभी बिहार बोर्ड से 2024 में मैट्रिक का परीक्षा देने के लिए तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए किस आर्टिकल के माध्यम से हिंदी का महत्वपूर्ण लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न बताया गया जो सीधे आपके परीक्षा में मिलने वाला है तो चलिए आप लोग नीचे हिंदी का महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव क्वेश्चन याद कर ले ताकि आपको एग्जाम में अच्छा सा अच्छा नंबर मिले ।

 

10th Hindi Examination 2024
10th Hindi Examination 2024

1  . निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक लगभग 20-30 शब्दों में दें।

5 x 2 = 10

1 . काशू और मदन के बीच झगड़े का कारण क्या था?

उत्तर :-

काशू ने मदन और उसके मित्रों को लट्टू नचाते देखा, तो उसकी तबीयत मचल गई। वह भी लड्डू नचाना चाहता था। पर, काशू से अपमानित-प्रताड़ित मदन नहीं चाहता था कि काशू लट्टू नचाए। इस बात को लेकर दोनों में झगड़ा हो गया। इस प्रसंग द्वारा लेखक (कहानीकार) आहत बाल मन की प्रतिक्रियाओं को प्रस्तुत करना चाहता है।

2 . नृत्य की शिक्षा के लिए पहले-पहल बिरजू महाराज किस संस्था से जुड़े और वहाँ किनके सम्पर्क में आए ?

उत्तर : –

नृत्य की शिक्षा के लिए पहले-पहले बिरजू महाराज निर्मला जोशीजी की संस्था ‘हिंदुस्तानी ‘डांस-म्यूजिक अकाडेमी’ दिल्ली से जुड़े। वहाँ वे कपिलाजी, लीला कृपलानी आदि के संपर्क में आए।

3 . गाँधी जी बढ़िया शिक्षा किसे कहते हैं?

उत्तर : –

गाँधीजी सबसे बढ़िया शिक्षा अहिंसक प्रतिरोध को मानते हैं। सही, बढ़िया और श्रेष्ठ शिक्षा वही है। जो हमें बुराई, अवगुण, हिंसा, अनैतिकता आदि का साहसपूर्वक विरोध करने के लिए तैयार करे। अहिंसक प्रतिरोध से विपक्ष की शारीरिक क्षति नहीं होती, अपितु उसके मन की सारी दुर्भावनाएँ हमेशा के लिए समाप्त हो जाती हैं। इसी अर्थ में यह बढ़िया शिक्षा है।

4 . मुक्ति के लिए किसे अनिवार्य माना गया है?

उत्तर : –

हिंदी तथा इसकी विविध बोलियों, नेपाली (खसकुरा) व नेवारी भाषाओं तथा मराठी भाषा की लिपि देवनागरी है। करीब दो सदी पूर्व पहली बार इस लिपि के टाइप निर्मित हुए और पुस्तकें छपने लगीं। अतः, देवनागरी लिपि में स्थिरता आ गई। केंद्रीय हिंदी निदेशालय तथा विभिन्न साहित्यिक परिषदों एवं विद्वानों के प्रयास से देवनागरी लिपि के मानक अक्षरों का निर्धारण किया गया है जिनका प्रयोग अब लिखने, प्रेस तथा कंप्यूटर में किया जाने लगा है। इस तरह, देवनागरी लिपि के अक्षरों में अपेक्षाकृत अधिक स्थिरता आ गई है।

 

5 . ‘हमारी नींद’ शीर्षक कविता किस कविता संकलन से ली गई है ?

उत्तर : –

‘हमारी नींद’ शीर्षक कविता ‘दुष्चक्र में स्रष्टा’ कविता संकलन से ली गई है?

6 . लक्ष्मण कहाँ नौकरी करता था?

उत्तर : –

लक्ष्मण कोलकाता में नौकरी करता था।

7 . ‘माँ’ कहानी के लेखक का क्या नाम है? वे कहाँ के रहने वाले हैं?

उत्तर : –

‘माँ’ शीर्षक कहानी के लेखक का नाम ईश्वर पेटलीकर है। वे जयपुर, राजस्थान के रहने वाले हैं।

10th Hindi Examination 2024
10th Hindi Examination 2024

8 . गाँधीजी किस तरह के सामंजस्य को भारत के लिए बेहतर मानते हैं, क्यों?

उत्तर : –

गाँधीजी प्राकृतिक सामंजस्य को भारत के लिए बेहतर मानते हैं। प्राकृतिक सामंजस्य में विभिन्न संस्कृतियाँ एक-दूसरे को प्रभावित करती हुई एक वृहत्तर संस्कृति का निर्माण करती हैं। इस प्रकार के सामंजस्य में कोई संस्कृति न तो बड़ी होती है और न छोटी। सामंजस्य की स्थिति में सारी संस्कृतियों का अपना-अपना अस्तित्व सुरक्षित होता है। ऐसा नहीं होता कि कोई संस्कृति प्रमुख बनकर और संस्कृतियों को हजम कर जाती है और उनके अस्तित्व को हमेशा के लिए मिटा देती है। जब कोई संस्कृति प्रमुख बनकर और दूसरी संस्कृतियों के अस्तित्व को मिटा देती है तब इस प्रकार के सामंजस्य में एक प्रकार की कृत्रिमता और जोरजबरदस्ती होती है। गाँधीजी को इस प्रकार का सामंजस्य अच्छा प्रतीत नहीं होता।

वे तो भारत के लिए विभिन्न संस्कृतियों के उस सामंजस्य की कल्पना करते हैं जिसमें विभिन्न संस्कृतियाँ एक-दूसरे को प्रभावित करती तथा एक-दूसरे से प्रभावित होती हुई अपना-अपना वैशिष्ट्य सुरक्षित रखती हैं। इस तरह का सामंजस्य ही प्राकृतिक या स्वाभाविक सामंजस्य होता है। इसी तरह के सामंजस्य में वास्तविक एकता सन्निहित होती है। अमरीकी ढंग का सामंजस्य कृत्रिम, अस्वाभाविक और अप्राकृतिक होता है। गाँधीजी इस प्रकार के सामंजस्य को भारत के लिए हितकर नहीं मानते ?

 

9 . हिरोशिमा में मनुष्य की साखी के रूप में क्या है ?

उत्तर : –

A . लेखक के अनुसार भारत में समाजवादी व्यवस्था कायम होने से यहाँ की राष्ट्रीय अस्मिता पहले से ज्यादा पुष्ट होगी। वे कहते हैं कि पूँजीवादी व्यवस्था में बेहिसाब शक्ति का अपव्यय होता है। देश के साधनों का सर्वोत्तम उपयोग समाजवादी व्यवस्था में ही संभव हो सकता है। लेखक कहते हैं कि समाजवादी व्यवस्था कायम होने से ही अनेक छोटे-बड़े राष्ट्र पहले से ज्यादा शक्ति संपन्न हो गए है। उनकी प्रगति की गति किसी भी पूँजीवादी देश की अपेक्षा बहुत तेज है। अतः, लेखक का मानना है कि समाजवाद हमारी राष्ट्रीय आवश्यकता है। समाजवाद की स्थापना से हमारा राष्ट्र शीघ्र ही शक्ति संपन्न हो जाएगा। (B) उपर्युक्त पंक्तियाँ ‘हिरोशिमा’ शीर्षक कविता से उद्धृत हैं। इसके रचयिता सच्चिदानंद हीरानंद

वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ है। प्रस्तुत पद्यांश में कवि ‘अज्ञेय’ ने 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा नगर पर हुए परमाणुबम विस्फोट की भयंकर स्थिति का वर्णन किया है। कवि कहता है कि अचानक हिरोशिमा नगर के चौक से एक सूरज निकलता है। जो रोज निकलनेवाले सूरज की तरह पूरब दिशा के क्षितिज पर नहीं निकलता और न ही उससे धूप बरसता है। यह तो नगर के बीचोबीच में निकलकर तेज विस्फोटक अग्नि बरसाता है। मानो कई सूरज एक साथ निकल गए हो और जिसकी रोशनी में मानव जन की छायाएँ दिशाहीन स्थिति में सब ओर पड़ीं। कवि आगे कहता है कि इस मानव-निर्मित विस्फोटक अग्नि बरसानेवाले सूरज के तेज से ऐसा लगा कि काल-सूर्य के रथ के पहियों के अरे टूटकर दसों दिशाओं में बिखर गए हैं।

10 . ‘मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं’ से कवि का क्या अभिप्राय है ?

उत्तर : –

कवि धनानन्द ने प्रेम-मार्ग की विशेषता का उल्लेख करते हुए कहा है कि यह ऐसा मार्ग है जिसमें मन चला जाता है किन्तु कुछ मिलता नहीं। वस्तुतः मन के यहाँ दो अर्थ हैं- एक अन्तर अर्थात् हृदय और दूसरा माप की इकाई ‘मन’ जो अपने जमाने में सर्वाधिक वजनी माना जाता था। इस प्रकार एक अर्थ यह है कि प्रेम-मार्ग में सर्वाधिक ‘मन’ देना किन्तु पाना एक छटाँक भी नहीं है। वस्तुतः कवि के मन लेहुँ पै देहु छटाँक नहीं कहने का तात्पर्य यह है कि प्रेम-मार्ग उत्सर्ग मार्ग हैं इस पर प्रतिदिन के आकांक्षी नहीं चलते।

11 . सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए लेखक ने किन विशेषताओं को आवश्यक माना है ?

उत्तर : –

सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए लेखक भाईचारा, सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान को आवश्यक माना है। समाज में सभी भाई-भाई की तरह रहे और सबमें एक-दूसरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव हो ।

 

नोट : –यदि आपको यह आर्टिकल अच्छा लगे तो हमारे इससे जुड़ी और भी आर्टिकल में मैट्रिक का सभी विषय का सब्जेक्टिव एवं ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन को तैयारी किया जाता है तो इस वेबसाइट को जरूर फॉलो कर ले ताकि आपको हर विषय में सबसे महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव एवं ऑब्जेक्टिव प्रश्न मिलता रहे ।

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Mukesh Kumar
Mukesh Kumar is a Bihar native with a Bachelor's degree in Journalism from Magadh University. With three years of hands-on experience in the field of journalism, he brings a fresh and insightful perspective to his work. Mukesh Kumar is passionate about storytelling and uses his roots in Bihar as a source of inspiration. When he's not chasing news stories, government jobs updates, Bihar Board News government schemes, latest news updates, tech trends, current events in various fields including sports, gaming, politics, government policies, finance and etc.
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